ऐसा भारतीय खिलाड़ी जिसने क्रिकेट को दिलाया मुकाम ,जानें पूरी जानकारी

 उन दिनों की बात है जब मनोरंजन का साधन केवल रेडियो हुआ करते थे।टीवी जहां थी भी तो प्रसारण केंद्र नहीं हुआ करते थे तब भी भारत में क्रिकेट का ऐसा क्रेज था कि लोग रेडियो में कान लगाकर मैच की रनिंग कॉमेंट्री सुना करते थे और एक वक्त ऐसा भी आया कि भारत ने सन् 83 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीत लिया और कपिल पा जी हमारे हीरो बन गये अभी कुछ दिन गुजरे ये समाचार देखने और सुनने मिला कि कपिल देव को गंभीर हार्ट अटैक पड़ा है।बहुत ही मन विचलित हो गया जानकर फिर खबर आई के उनके स्वास्थ्य  मेें सुधार है और उनको हस्पताल से छुट्टी मिल गई है।

 कपिल देव केवल भारतीय क्रिकेट जगत मेंं एक माइलस्टोन नहीं बल्कि उनका जीवन एक प्रेेरणास्त्रोत है।आज क्रिकेट में फटाफट और गटागट परंपरा शुरू हो गयी है मगर कपिल देव की बैैैटिंंग की रिकार्डिग जो उन्होने आज से करीब तीस सालों पहले की तो विराट कोहली और धोनी को भूूूल जाएंगे।वैैैसे तो उनको बैटिंग का मौका कम ही मिलता था, क्योंकि वेे नंंबर छह पर आते थे लेेेकिन जैसे ही ग्लब्स पहन कर मैैंदान मे पहुंचते थे ऐसी तालियों की गड़गड़ाहट होती थी जैसे कोई प्रधान मंत्री भारत का ध्वज फहराने जा रहा हो।एक सिहरन सी दौड़ जाती थी लोगों के दिलों मेे।वो समय ऐसा था जब पूरे क्रिकेट जगत में वेेेस्ट इंंडीज की बादशाहत चलती थी।मैैैल्कम मार्शल, होल्डिंग,ऐंडी राबर्ट जैैैसे जाने कितने ही तेज गेंंदबाज थे जिनके साामने अच्छे  अच्छे बैट्समैन भी कांंपने लगते थे मगर जहां तक कपिल पा जी की बात है तो वो इतनी सहजता से खेलते थे जैैैसे वो कोई टेेेनिस बाल से खेल रहे हों।समझ लीजियेे दर्शकों का पूरा पैैसा वसूूूल हो जाता था।1983 का विश्ववकप कोई सोचभी नही सकता था कि भारत एक मैच भी जीतने लायक है लेेकिन ये कपिल देव की कप्तानी और उनका जुुझारू पन ही था जिसने एक से दिग्गज टीमों को धराशायी किया और विश्व विजेता बनाया।जिम्बााब्वे के खिलाफ 175 रन की पारी आज भी मिसाल है।वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेलते हुुुए रिचर्ड का उल्टी तरफ भागतेे हुए लिया कैंच देख लीजिए तो दांंतोंं तले उंंगलियांं दबा लेंगे। जहां तक बालिंग का प्रश्न है तो जितने मेहनत और दमखम  कपिल देव ने दिखाया असंंभव सा लगता है अब।आज एक तेेज गेंदबाज एक स्पैैैल मेें चार से पांंच ओवर डालता हैजबकि इन्होंने एक छोर से लगातार बीस बीस ओवर डाले कभी किसी निचले क्रम के बल्लेबाज को शार्ट पिच गेंंद डालकर डराया नहीं।इतने बड़े करियर में कभी कोई चोट या इंंजयरी नहीं हुुुई।अपने समय के महान आलराउंडरोंं जिनमें इयान बाथम,रिचर्ड हेडली, इमरान खान शामिल थे इनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। 

लेेेकिन ये हमारे देश का दुर्भाग्य है कि न तो उन्हे कोई पूछता है न कोई सम्मान देेता हैै जबकि भारत में क्रिकेट को इतना ऊंंचाई पर पहुंचाने का श्रेय यदि किसी को है तो वह केेेवल और केेेवल कपिल देव को हैै।दोस्तों ये विवरण जो मैंने लिखा है वास्तव में मैने उन क्षणों को देखा है जिया है और अनुभव किया है।वास्तव में यदि खेल जगत में भारत का कोई आइकॉन है तो कपिल देव है।

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