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दिवाली की साफ सफाई मे आपकी सेहत नही हो जाए खराब इन बातों का खास रखें ध्यान

 हमारे आसपास कई सूक्ष्म जीव भी मौजूद होते हैं जो मौसम बदलने, साफ सफाई की कमी, ठीक से धूप न लगने पर तेजी से बढ़ने लगते हैं । सब दरवाजों के पीछे बाथरूम, टॉयलेट में, छत, मचान पर या बंद पड़े किसी कमरे में शीलन या फंगस के निशान देखने को मिलते हैं। जब दिवाली की सफाई के दौरान हमारी त्वचा फंगस के संपर्क में आती है 

तो त्वचा संबंधी रोगों की आशंका बढ़ जाती है। साइटोटॉक्सिक और इम्युनो टॉक्सिक जैसे बैक्टीरिया और फंगल प्रजातियां वातावरण में ऐसे तत्व पैदा करते हैं जो त्वचा एवं सेहत के लिए हानिकारक होते हैं । घरों में सीलन एक आम समस्या जो अल्टरनरिया, पेनिसिलियम, और क्लैडोस्पोरियम जैसी फंगल पर जातियों के पनपने के लिए अनुकूल होती है ।

ऐसे में दिवाली की सफाई के दौरान जब संवेदन शील त्वचा वाले लोग इस बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं तो त्वचा संबंधी अन्य बहुत सी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
जिससे त्वचा पर लाल दाने या निशान पड़ना,खुजली होना, त्वचा की ऊपरी परत का उतरना और शामिल है।
दीपावली की सफाई के दौरान घर को ज्यादा साफ और चमकदार बनाने के लिए अक्सर लोग फिनायल और इसके अलावा भी कई तरह की क्लीनर का इस्तेमाल करते हैं। जैसे सोडियम लारेट,सोडियम लॉरेथ, अमोनिया पाए जाते हैं जो सांस संबंधी रोगों के साथ-साथ आंखों पर भी बुरा प्रभाव डाल सकते हैं।
इन से से निकलने वाली हानिकारक गैसों से आंखों में जलन, पानी आना,सुखी और लाल होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
किस तरह के रसायनों का आंखों की रोशनी पर कोई स्थाई प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन फिर भी यदि आंखों के संपर्क में आ जाए तो आंखों के कोर्निया को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इसलिए खुजली होने पर आंखों को रगड़े नहीं बेहतर है कि तुरंत डॉक्टर से मिले।
हवा में प्रदूषण का स्तर सितंबर के अंत से ही खराब होना शुरू हो जाता है अक्टूबर-नवंबर तक आते-आते यह खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। इसलिए सावधान रहिए। 

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