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क्या साल पहले ही धरती पर कदम रख चुके हैं एलियन सैकडों ,जानें इस बारे में

 जैसाकि आप देख सकते हैं कि मैंने इस सीरीज का नाम बदल दिया है, क्योंकि एक जैसे नाम से पोस्ट करने में थोडी समस्या आ रही थी| और नाम खोजने में भी परेशानी आ रही थी| तो प्रारम्भ करते हैं आज की बात| आज का प्रमाण रामायण के बालकाण्ड में राम-सीता विवाह के समय की कुछ चौपाईयों ने मुझे एक बार फिर ये सोचने पर मजबूर किया है| कि ये मात्र संयोग है या वो सच जिससे हम अनजान हैं| रामायण कहती है कि सीता जी के पिता राजा जनक ने एक प्रण लिया था| जो भी व्यक्ति पिनाक नामक धनुष की प्रत्यंचा चढायेगा, उसी के साथ सीता का विवाह करेंगे| ये पिनाक धनुष इतना जड था कि कोई भी राजा या उस समय का वीर उसे हिला भी नहीं सका था| इस पोस्ट में हम समझेंगे कि पिनाक धनुष क्या था और क्या कोई और भी ऐसा शस्त्र था या नहीं, फिर हम इस पिनाक को वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से देखेंगे कि वास्तब में पिनाक क्या रहा होंगा और क्या वर्तमान में ऐसा कुछ है 



जो मेरी बातों को कुछ दम देता हो| तब शायद आप महसूस कर पायेंगे कि किस प्रकार ये घटनायें ये सोचने पर मजबूर करती हैं उस अलग सोच को सोचने पर जिससे मुझे लगता है कि “ एलियन सालों पहले ही धरती पर कदम रख चुके हैं पिनाक:- शास्त्र और पुराण बताते हैं कि पिनाक भगवान शिव का धनुष था| ये धनुष इतना प्रलयंकारी था कि इसके एक प्रहार से सम्पूर्ण पृथ्वी का विनाश सम्भव था| ये मात्र अकेला ऐसा शस्त्र नहीं था| इसी के जैसा एक और धनुष था जिसका नाम था सारंग| सारंग का जिक्र भी रामायण में सीता स्यंवर के समय मिलता है| कई पुस्तकें पढने और काफ़ी खोज के बाद भी मैं ठोस रूप से कुछ नहीं कह सकता इनके बारे में क्योंकि “जितने मूँह उतनी बातें” वाली बात है| प्रत्येक पुस्तक एक अलग ही बात बताती है| इनके अनुसार इन दौनों धनुषों शारंग और पिनाक का निर्माण स्वर्ग में किया गया था| इनकी क्षमता को परखने के लिये पिनाक को भगवान शिव को दिया गया और शारंग दिया गया भगवान विष्णु को और प्रार्थना की गयी कि आप दौनों इन धनुषों से युद्ध करो और देखो कि कौन सा धनुष अधिक शक्तिशाली है|

एक जगह प्रमाण मिलता है कि ये युद्ध प्रारम्भ होने से पूर्व ही ये भविष्यवाणी हुयी कि यदि इन धनुषों का प्रयोग हुआ तो इस श्रष्टि का विनाश हो जायेगा| इसलिये भगवान शिव ने ये धनुष फेक दिया जो पृथ्वी पर आके गिरा और राजा जनक के एक पूर्वज को मिला|

दूसरी जगह प्रमाण मिलता है कि ये युद्ध हुआ और इस युद्ध में शिव जी का पिनाक हार गया| इसलिये शिव जी ने ये धनुष पृथ्वी पर फेंक दिया|

एक अन्य जगह प्रमाण मिलता है कि पिनाक का निर्माण शिव जी ने एक दानव के संहार के लिये बनाया था और कहा गया है कि इसके एक प्रहार से ही उस दानव की तीनों नगरियों और उसका संहार कर शिव जी ने इसे व्यर्थ जानकर परशुराम जी को दे दिया| इस धनुष को परशुराम जी ने राजा जनक के पूर्वज को दिया था धनुष पर आधुनिक विचार:- करता ये सम््भव नही कि पिनाक और शारंग कुछ और नहीं ब्लकि दो ऐसे विनाशक हथियार थे| जो हमारे आधुनिक परमाणु हथियारों से भी अधिक घातक थे| आधुनिक विचारक मानते हैं कि वे हमसे तब जितने उन्नत थे| हम आज भी उतने उन्नत नहीं हो पाये हैं| जब हमारे आज के परमाणु हथियार हिरोशिमा और नागासाकी जैसे दो विशाल शहरों को पल में तबाह कर सकते हैं तो फिर वो हथियार जो इतने उन्नत थे वो कितने विनाशक रहे होंगे और रही बात इनके नाम की तो ये नाम कल्पना और वास्तविक दौनों में से कुछ भी हो सकता है, क्योंकि हमारे पूर्वजों को जो समझ आया होगा उसी आकृति के आधार पर या ध्वनि के आधार पर इनका नाम रख दिया गया हो| या हो सकता है ये नाम सच हो पर हम और हमारी भाषा शैली इतनी सक्षम नहीं है कि इनका सही मतलब समझ पाये| पिनाक और शारंग की शक्ति और क्षमता के बारे में तो आप ऊपर पढ ही चुके हैं| अगर माने कि विष्णु जी और शिव जी के मध्य युद्ध या उन शस्त्रों का परीक्षण जो कुछ भी हुआ था| तो क्या इसका कोई प्रमाण है या नहीं शास्त्रों व पौराणिक कथाओं के अतिरिक्त| तो मैं कहूँगा “हाँ” पर इस बात का जबाब जानने के लिये हमें जाना होगा पृथ्वी से बाहर एक ऐसे ग्रह पर जहाँ कभी जीवन रहा होगा| ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है| हमारे वैज्ञानिकों के द्वारा|  वो ग्रह है मंगल ग्रह जिसे अंग्रेजी भाषा में मार्श भी कहते हैं| ये एक ऐसा ग्रह है जिसमें आज कल वैज्ञानिक बहुत रुचि ले रहे हैं| मंगल ग्रह के शोध के लिये भारत ने एक मिशन भी चलाया था| मोम (मार्श अ‍ॅर्विट मिशन)| इस ग्रह को लाल ग्रह भी कहा जाता है, क्योंकि इसका वातावरण लाल रंग का है| हमारे सौर्य मण्डल का एक मात्र ऐसा ग्रह है, जिसपर जीवन की कल्पना की गयी है| वैज्ञानिकों की मानें तो कई लाख बर्ष पूर्व इस ग्रह पर जीवन रहा होगा, क्योंकि यहाँ का वातावरण कभी जीवन के पनपने के लिये पृथ्वी के समान ही रहा होगा| अगर वैज्ञानिकों की बात और पौराणिक ग्रंथ दौनों सही हैं तो मंगल ही वो ग्रह था जहाँ पिनाक और शारंग जैसे अति भयानक शस्त्रों का टकराव हुआ था| जिसके फलस्वरूप मंगल पर पनप रही किसी सभ्यता का विनाश हो गया| जो कि हमारे देवों या उन परिग्रहियों का परीक्षण हो या उनका युद्ध हो जिसका परिणाम घातक साबित हुआ| एक जीवित ग्रह और उस पर पल रही सभ्यता मृत हो गयी| मंगल ग्रह पर मिले साक्ष्य यही कहते हैं कि इस ग्रह पर कोई भयंकर और प्रलयंकारी युद्ध अवश्य हुआ था| जैसे कि मंगल के वातावरण में बहुत अधिक मात्रा में रेडियेसन का मिलना और वहाँ की मृदा में कई प्रकार के रेडियोएक्टिव पदार्थों का मिलना यही सावित करता है कि कोई तो था जो हमसे पहले इतना बुद्धिमान था और अपने ज्ञान के कारण एक ग्रह का अंत कर बैठे| और शायद इसी विनाश से द्रावित होकर उस धनुष को फेंक दिया गया| वह धनुष पहुँच गया पृथ्वी पर जो मिला राजा जनक के एक पूर्वज को और ये बन गया उनकी धरोहर| अब आपके मन में कुछ प्रश्न उठ रहे होंगे| जैसे कि.....1. राजा जनक ने ऐसा प्रण क्यों लिया जो किसी के लिये कर पाना सम्भव नहीं था?

2. दूसरे धनुष शारंग का क्या हुआ? 

3. क्या फिर कभी पिनाक और शारंग का प्रयोग हुआ?

सीता स्वंयवर में ऐसा क्या खाश हुआ जो वैदिक और पौराणिक द्र्ष्टि से आप आज तक नहीं देख पाये ये जानने को तो अब आप उत्सुक होंगे ही| साथ-साथ अब उन परिग्रहियों को जानने की और भी जिज्ञासा जाग उठी होगी| कौन है वो और क्यों आते हैं पृथ्वी पर बार-बार| क्यों देव बनकर हमें ज्ञान दिया| ये सारे प्रश्न होंगे आपके? और मैं इन्हीं प्रश्नों के उत्तर खोज रहा हूँ और जल्दी ही मेरी पोस्ट में इनके जबाब होंगे| ये आप अच्छे से जानते हैं| मेरे सारे जबाब मेरे मन से होते हैं जिनका आधार विभिन्न पुस्तकों का ज्ञान और व्यवहारिकता होती है| समकालीन हो रहीं गतविधियां तथा हो चुके तथ्यों का योग ही हमें हमारे प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं| अगला पोस्ट मंगल से सम्बंधित होगा क्योंकि यहाँ के बारे में बहुत कुछ बताना है| मेरे विचारों को केवल पढे ही नहीं सोचे भी और मुझे फौलो जरूर करें ताकि मेरी कोई बात छूट न जाये|

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