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घर घर जाकर चौका बर्तन धोने वाली ये महिला भारतीय नेताओं के साथ बिता चुकी है कई रात ,जानें पूरी खवर

 आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी महिला की कहानी जो एक मामूली सी महिला होकर भी बड़े बडे नेताओं को हिलाकर रख दिया। जी हां जैसा कि हम सभी ये तो जानते ही हैं कि राजस्‍थान में महिलाओं की क्‍या स्थिति है वहीं आज हम आपको जिस महिला के बारे में बताने जा रहे हैं उसके बारे में आपने सुना तो बहुत कुछ होगा लेकिन अभी भी कुछ ऐसी सच्‍चाई है जिसे आप जान नहीं पाएंगे होंगे। तो आपको बता दें कि हम बात कर रहे हैं राजस्‍थान के नट बिरादरी से ताल्लुक रखने वाली भंवरी देवी का। आपको बता दें कि जोधपुर के करीब पैनन कस्बे के एक सरकारी अस्पताल में बतौर नर्स काम करती थी वैसे तो उसकी शादी भी हो चुकी थी लेकिन मॉडलिंग और राजस्थानी एल्बम को सीढ़ी बना कर वह राजस्थानी फिल्मों की हीरोईन बनने का सपना पाल रही थी जिसे पूरा करने के लिए वो हर काम करने को तैयार थी। 



बताया जाता है कि उस गांव के अस्पताल में ले देकर एक ही वही नर्स थी और वो भी ड्यूटी से गायब रहती थी जिसकी वजह से कुछ ही दिन में उसे नौकरी से भी सस्पेंड कर दिया गया था। इतना कुछ होने के बाद उसकी मुलाकात कांग्रेस के कद्दावर नेता विश्नोई के पुत्र मलखान से हुई और इनकी दोस्‍ती प्‍यार में बदल गई और फिर क्‍या था भंवरी देवी ने एक बेटी को भी जन्म दिया। वहीं इसके बाद वो इन सबके बीच भंवरी के मन में भी राजनीति में आने का सपना आने लगा था और उसने अपनी मन की बात पूरी करने के लिए मलखान के अलावा दिग्गज कांग्रेस नेता परसराम मदेरणा के पुत्र महिपाल मदेरणा से भी दोस्ती का ली और जैसे जैसे समय बितता गया वैसे वैसे वो दोनों यानि मलखान और महिपाल के करीब हो गई। भंवरी को भी धीरे धीरे सत्ता की ताकत का एहसास हो गया था जिसकी वजह से वो इन्ही दोनों नेताओं के जरिए बाकि के नेताओं से भी मिल चुकी थी और अब उसकी जिंदगी भी काफी बदल गई थी। कुछ ही समय में उसकी तरक्‍की कुछ इस तरह हुई कि उसने नया घर, कई कार खरीदी, और अपने बेटी और बेटे का दाखिला नामी स्कूल में करवाया। साल 2010 तक भंवरी ने सत्ता का खूब सुख भोगा पर अचानक बात बिगड़ी गई नेताओं के नजदीक होने के कारन उसने एमएलए का टिकट मांगने लगी लेकिन उसकी इस मांग को वो पचा नहीं पा रहे थें और महिपाल और मलखान ने इसे मानने से इंकार कर दिया और सत्ता का सुख भोगने वाली भंवरी की आदते बेलगाम हो गई। लेकिन इसी बीच मलखान की बहन इंद्रा ने भंवरी के अपहरण की साजिश रच उससे सीडी छीनने की योजना तैयार की विशनाराम की योजना भंवरी को टॉर्चर कर सीडी लेने की थी, लेकिन रास्ते में भंवरी ने विरोध करते हुए चिल्लाना शुरू कर दिया, फिर उसे चुप कराने के प्रयास में विशनाराम ने भंवरी का गला दबा दिया, जोर से गला दबते ही उसका दम टूट गया। उसके बाद विशनाराम ने उसकी चिता को जलाकर उसकी राख को राजीव गाँधी लिफ्ट नहर में बहा दिया। उसदिन के बाद आजतक भंवरी कभी घर नहीं लौटी।

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