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नींबू के पानी का सेवन ज्यादा मात्रा में सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

 नींबू पानी सेहत के लिए खासा फायदेमंद माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ वजन घटाने के लिए रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने की सलाह देते हैं। वहीं, लंच या डिनर के बाद नींबू पानी का सेवन करने से खाना जल्दी पचाने में मदद मिलती है। हालांकि, मोटापे से मुक्ति और हाजमा दुरुस्त रखने के चक्कर में जरूरत से ज्यादा नींबू पानी पीना माइग्रेन के दर्द को भी उभार सकता है। मेलबर्न यूनिवर्सिटी के तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञों ने अपने हालिया अध्ययन के आधार पर यह चेतावनी दी है। शोधकर्ता रेबेका ट्रॉब के मुताबिक नींबू में ‘टाइरामाइन’ नाम का एमिनो एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्राकृतिक ‘मोनोअमाइन’ की भूमिका निभाता है। ‘मोनोअमाइन’ तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित करने वाले प्रमुख न्यूरोट्रांसमिटर में शुमार है। इसकी अधिकता तंत्रिका तंत्र में खून का प्रवाह करने वाली नसों में सिकुड़न का सबब बनती है।

ट्रॉब ने बताया कि नसें सिकुड़ने पर खून के बहाव के दौरान उन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे सिर में असहनीय दर्द उठना लाजिमी है।रेबेका ने बताया कि नींबू विटामिन-सी का बेहतरीन स्रोत है। जब शरीर में इस विटामिन का स्तर बढ़ जाता है, तब फल-सब्जियों में मौजूद आयरन सोखने की उसकी क्षमता में भी इजाफा होता है। ‘हीमोक्रोमाटोसिस’ सहित अन्य जेनेटिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में अगर आयरन ज्यादा मात्रा में जुटने लगे तो अंग खराब होने का डर बढ़ जाता है।रेबेका की मानें तो विटामिन-सी की अधिकता से पेट में अम्लों का स्त्राव बढ़ने की भी आशंका रहती है। इससे एसिडिटी की समस्या और गंभीर रूप अख्तियार कर सकती है। व्यक्ति को न सिर्फ पेटदर्द, बल्कि गले-सीने में जलन, मिचली, उल्टी और दस्त का सामना करना पड़ सकता है। ‘गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज’ से पीड़ित मरीजों के लिए नींबू न खाने में ही भलाई है।नींबू अपने एसिडिक गुणों के चलते दांतों की रक्षा करने वाले ‘इनैमल’ में क्षरण का सबब बन सकता है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन की ओर से 2015 में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई थी। शोधकर्ताओं ने नींबू पानी को स्ट्रॉ से पीने की सलाह दी थी, ताकि दांत से उसका सीधा संपर्क कम ही हो। यही नहीं, नींबू पानी के सेवन के तुरंत बाद ब्रश करने से बचने को भी कहा था।नींबू अपने एसिडिक गुणों के चलते दांतों की रक्षा करने वाले ‘इनैमल’ में क्षरण का सबब बन सकता है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन की ओर से 2015 में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई थी। शोधकर्ताओं ने नींबू पानी को स्ट्रॉ से पीने की सलाह दी थी, ताकि दांत से उसका सीधा संपर्क कम ही हो। यही नहीं, नींबू पानी के सेवन के तुरंत बाद ब्रश करने से बचने को भी कहा था। 

नींबू में मौजूद ‘टाइरामाइन’ प्राकृतिक ‘मोनोअमाइन’ की भूमिका निभाता है
-तंत्रिका तंत्र में खून का प्रवाह करने वाली नसें सिकुड़ने से होता है सिरदर्द

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