अपने हमेशा अपने ही होते हैं चाहे कुछ मनमुटाव वाली स्थिति उत्पन्न हो तो भी अपनों का साथ अपने जैसा ही होता है परंतु आज के समय में अपनों में बढ़ती दूरियों को कुछ ज्यादा ही मात्रा में देखा जा सकता है आइए इसके कुछ मुख्य कारण जानते हैं  1 कार्य में व्यस्थता जब कोई व्यक्ति अपने कार्यों में लीन रहता है तब उसे इन बातों का भान ही नहीं रहता कि अपनों के बीच कुछ पल बिताने चाहिए वो पल तो धीरे-धीरे लुप्त हो रहे हैं ऐसे में सामने वाला यही सोचता है कि पता नहीं क्यों आजकल इन्हें हमारे में रुचि ही नहीं रही है इस स्वमन स्वभाव के कारण कार्यों में व्यस्त व्यक्ति के प्रति भावों नकारात्मकता आना स्वाभाविक है पर आज के समय में ये तो भुलते ही जा रहे हैं कि अपनों के लिए ही तो व्यस्त हैं और अपने ही दूरी बनाते जा रहे हैं
2  रिश्तो में गरिमा का अभाव
अपने सभी निजी लोग अपने जीवन में कुछ काम खुद ही करना पसंद करते हैं उन्हें किसी और का दखल देना पसंद नहीं है ऐसे में जब व्यक्ति उस काम को बिना किसी कि राय लिए करता है तो रिश्तेदार और अपनों के मन में यही रहता है कि इन्हें हमारी राय की जरूरत नहीं है और वे स्वयं ही अपने को वहां पर महत्वहीन समझ बैठते हैं जिससे बात तो होती नहीं समय के साथ साथ सिर्फ हाय हेलो तक ही व्यवहार है जाता है रिश्तो की गरिमा में गहराई बढ़ती चली जाती है


3 तरक्की से मनमुटाव
हमारे समाज में सभी लोग तो बड़े औहदे पर या बड़ा बिजनेस नहीं करते सिर्फ यही अपने छोटे-मोटे काम कर अपने परिवार को सिंच रहे होते हैं कुछ लोग अपनों के बीच रहकर बड़ी सफलता तक पहुंच जाते हैं पर कुछ तो करीबी लोग यह सोचकर दूरी बना लेते हैं कि अब वह बड़े आदमी बन गए हैं उन्हें हमारी जरूरत नहीं है और कुछ सफल हुए व्यक्ति के मन में भी कहीं ना कहीं यही भाव उत्पन्न हो जाता है कि समय ना मिल पाने के कारण वह नहीं मिल पाते और दूरी बढ़ना लाजमी है
4 बातों में गहराई का अभाव
आजकल यह तो आप सभी बहुत बार देख रहे होंगे जब दो अपने आपस में बात कर रहे होते हैं तो एक मन में अजीब सा बोझ महसूस कर बात कर रहे होते हैं क्योंकि वह मन के बोझ को हल्का करने का समय ही नहीं निकाल पाते और बस कुछ हाय हेलो से शुरू करते हैं और हाय हेलो पर ही बात समाप्त हो जाती है जो दिल की गहराई से बात होनी चाहिए वह नहीं हो पाती और अपने समय के अभाव में पराए होते चले जाते हैं
5 मानसिक तनाव
आज की भाग दौड़ वाले समय में तनाव तो पेट्रोल-डीजल के दाम की तरह बढ़ता जा रहा है मानसिक तनाव जीवन के लिए सही नहीं है अगर गहराई से सोचा जाए तो तनाव हमें कई प्रकार की बीमारियों व शारीरिक नुकसान के साथ-साथ अपने निजी व सामाजिक जीवन में भी गहरा प्रभाव डाल रहा है तनाव अपनों की बात सुनने को तैयार नहीं है और अपने उनके तनाव को सहन करने को तैयार नहीं है अपने कभी नहीं सोचेंगे कि आप तनावपूर्ण जीवन जी रहे हैं इसमें उन्हें आपका बिगड़ा हुआ एटीट्यूड ही दिखाई देगा जो दूरी बढ़ाने के लिए काफी है।