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यहां द्रोपदी की तरह कई पुरुषों ने की एक बीवी से शादी,जानें

आजकल दूरदर्शन भारती टीवी चैनल पर तीन दशक पुराना महाभारत सीरियल खासा लोकप्रिय हो रहा है। द्रोपदी का चरित्र बहुत ज्यादा हद तक महाभारत का केद्रीय चरित्र है। द्रोपदी पांच पांडव भाइयों की पत्नी है। क्या आपको मालूम है कि हमारे देश में हिमाचल व तिब्बत में कई जगहों पर बहु पति प्रथा को सामाजिक मान्यता मिली हुई है। यानि एक महिला एक साथ कई भाइयों से विवाह करती है। देश में ऐसी प्रथाएं कई स्थानों पर हैं। हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के इलाकों में बहुपति प्रथा अब कम बेशक हो चुकी है लेकिन कायम जरूर है। तिब्बत में भी इसका उल्लेख मिलता है। हिमाचल व उत्तराखंड दोनों राज्यों के कबायली इलाकों में आज भी कई स्त्रियों के एक से लेकर पांच-सात पति तक हैं। दक्षिण हिंदुस्तान व नार्थ ईस्ट में कई जनजातियों में ये प्रथा है।


इस प्रथा को लेकर पिछले दिनों में विदेशी मीडिया में भी बहुत ज्यादा चर्चा रही है। सीएनएन व ब्रिटेन की प्रमुख वेबसाइट मेल आनलाइन ने बहुत ज्यादा विस्तार से रिपोर्ट्स दी हैं। इस प्रथा में एक स्त्री को पति के भाइयों से भी विवाह करनी होती है। पहले वो परिवार के किसी एक पुरुष से विवाह करती है व फिर उसकी विवाह उसके भाइयों से भी होती जाती है।
इन सभी शादियों में सभी पति बारी बारी से पत्नी के साथ समय गुजारते हैं। आमतौर पर कोई शिकायत सामने नहीं आती। यहां की महिलाएं भी खुशी-खुशी इस परंपरा को स्वीकार करती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी हिंदुस्तान में हिमाचल के किन्नौर व उत्तराखंड में चाइना से सटे इलाकों में ये प्रथा है।
हिमाचल की बहुपति परंपरा में एक ही छत के नीचे रहने वाले परिवार के सभी भाई एक ही युवती से परंपरा के अनुसार, विवाह करते हैं। वैवाहिक ज़िंदगी जीते हैं। अगर किसी महिला के कई पतियों में से किसी एक की मृत्यु भी हो जाए तो भी महिला को दुख नहीं मनाने दिया जाता।
विवाह के बाद भाइयों के बीच विवाहित ज़िंदगी को लेकर एक सहमति बन जाती है। एक टोपी उसमें खासा अहम भूमिका निभाती है। अगर किसी परिवार में चार भाई हैं। सभी का शादी एक ही महिला से हुआ है। ऐसी स्थिति में अगर कोई भाई महिला के साथ कमरे में है तो वो बाहर दरवाजे पर अपनी टोपी रख देता है। इससे मालूम हो जाता है कि कोई भाई अंदर है। तब कोई भाई उस कमरे में नहीं घुसता।
फारवर्ड प्रेस ने इसे लेकर एक लंबा साक्षात्कार भी किया था। जिसके अनुसार इस तरह के शादी को बेशक कानूनी मान्यता नहीं मिली है लेकिन ये समाज का ऐसा कस्टम है, जिसे स्वीकार्यता मिली हुई है। इस तरह के शादी को ञमफो पोसमा बाेला जाता है। अलबत्ता इन जगहों पर अंतरजातीय शादी को जरूर अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता।
इस शादी में तलाक का भी रिवाज होता है। इसके लिए सभी भाइयों को साथ जाकर तलाक की पारंपरिक परंपरा को पूरा करना होगा। इसमें दोनों पक्षों के बीच लोग बैठते हैं। एक सूखी लकड़ी जाती है। इस लकड़ी को लेकर तोड़ दिया जाता है। लक्कड़ तोड़ने का मतलब होता है तलाक लेकर अलग हो जाना। इसके बाद संबंध समाप्त हो जाता है। हालांकि तलाक के बाद कई बार फिर सहमति बनने पर दोबारा विवाह का भी प्रावधान होता है।

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