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भारत में मौजूद इन 5 गुफ़ाओं के बारे में जानने के लिए आते है विदेशों के लोग ,जानें क्या है खाशियत


भारत का इतिहास सुनहरी और शानदार कहानियों से भरा हुआ है, देश के हर कोने में आपको कई रोचक कहानियां और दंत कथाएं सुनने को मिल जाएंगी। हर जगह हर शहर का इतिहास आपको रोमांचित कर देगा। ऐलोरा और अजंता गुफ़ाए उन्ही कहानियों का हिस्सा हैं, लेकिन भारत में कई ऐसी गुफ़ाएं हैं जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। तो चलिए इतिहास की धूल हटा कर ऐसी ही कुछ गुफ़ाओं से आपका परिचय कराते हैं, जिनका रहस्य और कहानियां आपको मंत्रमुग्ध कर देंगी -
कर्नाटक के जिले बागलकोट के पास मिली ये गुफ़ा कई मायनों में नायाब है। करीब 540 से 757 ईस्वी में के दौरान ये जगह चालुक्य राजवंश की राजधानी रही थी। इन गुफ़ाओं में पाषाण काल के शिल्प का बेजोड़ नमूना देखने को मिलता है, इस गुफ़ा में हिन्दू देवी-देवताओं के कई मंदिर मिले हैं। 1957-58 में खोजी गई इस गुफ़ा को महाभारत काल का बताया जाता है। 


मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की पहाडियों में इस गुफ़ा की खोज की गई थी। इस गुफ़ा की दीवारों पर बनी आकृतियां पुरापाषाण काल से मध्यपाषाण काल की बताई जाती हैं, ये भी कहा जाता है कि इन आकृतियों को आदि मानवों द्वारा बनाया गया था। करीब 30 हज़ार साल पुरानी इस गुफ़ा को साल 1990 में देश की धरोहर घोषित कर दिया गया था और 13 साल बाद 2013 में इसे विश्व धरोहर का दर्जा हासिल हुआ।

उदयगिरि और खंडगिरि में कभी प्रसिद्ध जैन मठ हुआ करते थे, इन मठों को पहाड़ी की चोटी पर चट्टानों को काट कर बनाया गया था। ये भुवनेश्वर से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। उदयगिरि में 18, वहीं खंडगिरि में 15 गुफाएं मिला कर कुल 33 गुफ़ाएं हैं, यहां एक दो तल वाली भी गुफ़ा है जिसे लोग 'रानी गुफ़ा' कहते हैं। इनमें जो सबसे बड़ी गुफ़ा है उसे 'हाथी गुफ़ा' कहा जाता है।



कहा जाता है कि इस गुफ़ा का इतिहास त्रेता युग से भी पुराना है, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से 14 किलीमीटर की दूर पर बनी इस गुफ़ा में भारत के इतिहास के कई राज़ छिपे हैं। ये गुफ़ा करीब 160 मीटर लम्बी और 90 फ़ीट गहरी है, ये भी कहा जाता है कि इस गुफ़ा के बारे में पुराणों में भी लिखा है।

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