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भगवान शिव का कैसे हुआ जन्म जानकर आप रह जायेंगे दंग,जानें

जब भी आप पुराण पढ़ेंगे तो आपको देखेंगे कि गरुड़ पुराण में विष्णु जी को श्रेष्ठ बताया गया है। और शिव पुराण के अनुसार शिव जी को श्रेष्ठ बताया गया है। तो क्या भगवान शिव अजन्मे है इस बारे में शिव पुराण में एक कथा वर्णित है। जो कुछ इस प्रकार है एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर एक जंग सी छिड़ गयी और वो एक दूसरे से अपने को श्रेष्ठ और रचियता सिद्ध करने में लगे हुए थे। तभी वहां एक प्रकाशीय पिंड प्रकट होता है। और दोनों को लड़ने से रोकते है और कहते है कि आप दोनों में से श्रेष्ठ कौन है यें मै सिद्ध करूँगा। मै आपको अपने इस प्रकाशीय पिंड के छोड़ का पता लगाने का कार्य सौंपता हुँ जो इस प्रकाशीय पिंड के छोड़ को सबसे पहले पता लगाएगा वो श्रेष्ठ होगा और रचियता भी। दोनों भगवान इस कार्य में लग जाते है। ब्रह्मा जी ऊपर की ओर जाते है। और विष्णु जी नीचे की ओर जाते है। कई वर्ष बीत जाते है। लेकिन उस प्रकाशीय पिंड का अंत नहीं मिलता है।


तब ब्रह्मा जी को रास्ते में केतकी का फूल मिलता है जिसे वो अंत मानकर शिव जी के पास आ जाते है ओर कहते है कि मैने अंत ढूंढ लिया है। और प्रमाण के तोड़ पर केतकी का फूल दिखाते है। इसे देखकर शिवजी क्रोधित हो उठते है। और ब्रह्मा जी को श्राप दे देते है कि आप की कभी पूजा नहीं होगी। और केतकी के फूल मेरी पूजा में वर्जित होंगे। क्योंकि इन फूलों में आपके अहंकार का वास है।
इस प्रकार विष्णु भगवान भी इस प्रकाशीय पिंड के अंत को नहीं ढूंढ पाते है। तब शिव भगवान बताते है कि आप दोनों का रचयिता मै ही हुँ और आप दोनों मेरे द्वारा उत्पन्न हुए। मै ही आदि हुँ और अंत भी।
शिव शिव शिव शिव
शिव शिव शिव शिव
आदी अनंत शिव
योगी महादेव
योगी महादेव
आदी अनंत शिव
महाबली शिव

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