विवाह में आ रही रुकावटों से बचने के लिए करें यह आसान उपाय

विवाह एक बहुआयामी संस्कार है। यह हमारी प्राचीन काल से चलता आ रहा है। यह सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित बड़े बुजुर्गों की रीति है। जिन युवक-युवतियों के विवाह समय पर और बिना किसी विघ्न के संपन्न हो जाते हैं, अपने को भाग्यशाली मानते हैं। जिन युवक-युवतियों के विवाह में बहुत देर हो जाती है, और विवाह में रुकावट आने लगती है, उनके माता-पिता के लिए अत्यधिक चिंता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
विवाह एक सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित नीति पर एक ऐसी व्यवस्था का नाम है, जो मनुष्य का जीवन सुचारु रुप से चलाती है। विवाह में रुकावट आ जाती है तो माता-पिता ज्योतिषियों के चक्कर लगाते हैं। ऐसे में ज्योतिष शास्त्र की भूमिका अत्यंत उत्तरदायित्व पूर्ण हो जाती है। किसी भी जात की विवाह हेतु उसके जन्म में द्वितीय, पंचम, सप्तक, एवं द्वादश भाव का विश्लेषण अच्छी तरह करना चाहिए। अब मैं आपको विवाह में आने वाले विलंब कैसे आता है यह बताने जा रहा हूं


  1. यदि शुक्र, कर्क राशि का या सिंह राशि में स्थित हो और सूर्य अथवा चंद्र द्वितीय या द्वादश हो तो विवाह नहीं होता।
  2. शनि सर्वाधिक मंद गति से भ्रमण करने वाला ग्रह होता है। द्वादश राशियों में भ्रमण करने में इन्हें 30 वर्ष लग जाते हैं। अतः विवाह विलंब में शनि प्रमुख कारण होते हैं। जब किसी कुंडली में शनि चंद्रमा अथवा सूर्य से युक्त या दृष्ट होकर सप्तम भाव अथवा लग्न में स्थित हो तो विवाह नहीं होता है।
  3. शनि वह सूर्य संयुक्त रूप से लग्न में हो, तब भी बाधा आती है।
  4. जिस कन्या के विवाह में विलंब हो रहा हो,वह यह था नियम व विधि अनुसार सिद्ध शिवलिंग पर 11 अथवा 21 माला 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जप करें तो अति शीघ्र विवाह होता है।
  5. गायत्री मंत्र का जाप करने से शीघ्र विवाह होता है। सौभाग्य वृद्धि होती है।
  6. गुरुवार का व्रत करने वह केले के वृक्ष की पूजा करने से शीघ्र विवाह होता है।
  7. सोमवार से शुक्रवार का नियम - विधि अनुसार व्रत करने से शीघ्र विवाह होता है।

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