शहीद सरदार उधम सिंह ने जलियांवाला बाग नरसंहार के दोषी से इस तरह लिया था बदला,जानिए

जलियांवाला बाग का वह कांड भला कौन भूल सकता है? 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों निहत्‍थे भारतीयों पर अंग्रेजों ने ताबड़तोड गोलियां चलाई थीं और न जाने कितने मासूम लोगों का खून बहाया था।

दरअसल, 13 अप्रैल को एक जनसभा के दौरान ब्रिगेडियर जनरल डायर ने अंधाधुंध गोलियां बरसाने के आदेश दिए थे। 90 अंग्रेज सैनिकों ने सिर्फ दस मिनट में ही 1650 राउंड गोलियां चलाई चलाई थी।



वहां से निकलने के सारे मार्ग बंद कर दिए गए और अपनी जान बचाने के लिए लोग मैदान में मौजूद एकमात्र कुएं में कूद गए। देखते ही देखते वहां कई लाशें बिछ गई। इस भयावह नरसंहार में करीबन 1 हजार से भी ज्‍यादा लोगों की जान गई थी और लगभग 2 हजार से भी ज्‍यादा लोग घायल हुए थे।

इस हमले ने उधम सिंह को पूरी तरह से झकझोर के रख दिया था। उन्होंने अंग्रेज अधिकारी जनरल डायर को मारने का प्रण कर लिया और इसे पूरा भी किया।


इसके लिए उधम सिंह ने अलग-अलग नामों से विभिन्न जगहों ब्राजील, नैरोबी, अफ्रीका और अमेरिका की यात्रा की। 1934 में आखिरकार वह लंदन पहुंचे। यहां उधम सिंह ने एक रिवॉल्वर खरीदी और जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के कॉक्सटन हॉल में उन्होंने वहां मौजूद डायर पर गोलियां दाग दीं। डायर को मारने के बाद उधम सिंह वहां से भागे नहीं, बल्कि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया।

इस हमले में उधम ने वहां मौजूद किसी और को अपना निशाना नहीं बनाया। जब अदालत की सुनवाई के दौरान उनसे पूछा गया कि उन्होंने वहां मौजूद और किसी पर हमला क्यों नहीं किया, तो उनका कहना था कि सच्चा हिंदुस्तानी कभी महिलाओं और बच्चों पर हथियार नहीं उठाता।

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