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भगवान शिव को सावन महीना इतना प्रिय क्यों है जानें क्या है राज

पूरे भारत में सावन महीने को एक त्यौहार के रूप में  मनाया जाता है ऐसा कहा जाता है कि सावन महीना सबसे पावन महीना है सावन महीने में ही वर्षा की शुरुआत होती है | सावन के पूरे महीने को भिन्न भिन्न प्रकार से मनाया जाता है सावन महीना में पूजा करने से सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं | सावन महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है आखिर क्यों भगवान शिव को सावन महीना इतना प्रिय है चलिए जानते हैं |
 ऐसा माना जाता है कि जब दक्ष प्रजापति की पुत्री सती से भगवान शिव का विवाह हुआ था उसके कुछ समय बाद दक्ष प्रजापति ने अपने घर में एक यज्ञ आयोजित किया था जिसमें उन्होंने सभी देवताओं को बुलाया लेकिन भगवान शिव को नहीं  बुलाए. क्योंकि भगवान शिव शेर की खाल पहनते थे गले में नाग पहनते थे और मुर्दों की राख को अपने शरीर पर लगाते थे और उन्हें लोग जंगली तपस्वी कहते  थे.  जब यज्ञ शुरू हुआ तो वहां सभी देवता थे| लेकिन भगवान शिव और सती नहीं आई जब 


यह बात माता सती को पता चली कि दक्ष प्रजापति के घर में यज्ञ है तो उन्होंने भगवान शिव से वहां जाने के लिए कहा लेकिन भगवान शिव ने यह कह कर टाल दिया कि उन्होंने हम लोगों को आमंत्रित नहीं किया है | इसलिए हम वहां नहीं जाएंगे लेकिन माता सती नहीं मानी और भगवान शिव की बात को टाल कर चली गई और अपने पिता दक्ष से पूछी तो उन्होंने भगवान शिव की बहुत ही बुराई की जिस वजह से माता सती को बहुत ही क्रोध आया और वह उसी यज्ञ में अपना जीवन त्याग  दि.जीवन त्यागने के बाद उन्होंने कई वर्षों तक शापित जीवन जिया उसके बाद उन्होंने हिमालय राज के घर में    पार्वती के रूप में जन्म लिया और वह भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए पूरे सामान भर भगवान शिव के पूजा करने लगी | जिस वजह से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें उनका मनचाहा वरदान दिया.इस वजह से सावन महीना को सबसे पावन माना जाता है और यह भगवान  शिव का अत्यंत प्रिय महीना है| 

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