पुरानी परंपरा के अनुसार छोटे बच्चों को काजल हर मां बाप लगाते हैं क्योंकि बच्चे को बुरी नजर से बचाया जा सके और कुछ तो अपने बच्चों को खूबसूरत दिखाने के लिए काजल लगाते हैं।


पुराने बुजुर्ग लोग दीए में रूई की बाती डालकर उसमें घी या तेल से आग लगाकर जलाया करते थे। उसकी राख से अपने बच्चों को काजल लगाते थे। इससे आंखें बड़ी बड़ी दिखने लगती थीं। बहुत से लोग मानते थे कि आंखों में काजल लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ती जाती है। परंतु ऐसा कोई साइंटिफिक कारण नहीं है जो इस बात की पुष्टि करता हो। बहुत से लोग तो यह कहते हैं कि काजल लगाने से सूरज की नकारात्मक ऊर्जा बच्चों को नहीं छू पाती हैं।



दोस्तों डॉक्टर तो इस बात की पुष्टि करते हैं कि काजल में लेड की मात्रा ज्यादा होती है। जिसकी वजह से बच्चों की आंखें खराब हो जाने का खतरा रहता है। इससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है तथा आंखों में जलन भी हो सकती है। लेड इतना खतरनाक होता है कि इन्हें बच्चों की पहुंच से दूर रखा जाना चाहिए। मार्केट का बना हुआ काजल, उसमें भी लेड की मात्रा बहुत ज्यादा होती 




है और पेरेंट्स घर पर बनाकर काजल लगाते हैं डॉक्टर कहते हैं कि घर का काजल भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि उसमें कार्बन की मात्रा ज्यादा होती है। बहुत से पेरेंट्स अपने हाथों से काजल अपने बच्चों की आंखों में लगाते हैं किसी भी संक्रमण फैलने का खतरा खड़ा रहता है क्योंकि उनके साथ नहीं रहते हैं